Last Updated on 14/06/2023 by S.R. Verma

भरत सरकार, वित्त मंत्रालय द्वारा वर्ष 2020 के बज़ट में आयकर की एक नई कर प्रणाली को शुरू किया था | जिसे नई टैक्स प्रणाली (New Tax Regime (NTR) के नाम से जाना जाता है| वर्ष 2023 में प्रस्तुत आम बज़ट में उक्त नई कर प्रणाली में कुछ बदलाव किये गए हैं जिससे यह नई टैक्स प्रणाली (New tax system) काफी प्रासंगिक हो गयी है |

इस आर्टिकल के माध्यम से हम जानेंगे कि नई टैक्स प्रणाली और पुरानी टैक्स प्रणाली में क्या अंतर है (New Vs Old Tax Regime) ? और नई और पुरानी कर प्रणाली में से आपके लिए कौन सी अच्छी है?

Table of Contents

नई कर प्रणाली क्या है? : New Tax Regime in hindi

नई कर प्रणाली (nai kar pranali) के अंतर्गत कोई भी डिडक्शन नहीं दिए जाते हैं जैसा कि पुरानी कर प्रणाली (Old tax regime) के अंतर्गत 80C, 80D, 24B, 80CCD(1), 80CCD(2), 80CCD(1B), 80G, 80TTA, 80TTB  आदि दिए जाते है| यदि आप उक्त किसी डिडक्शन या अन्य किसी डिडक्शन का लाभ लेना चाहते हैं तो आपको पुराने कर प्रणाली को अपनाना होगा|  

किन्तु वर्ष 2023-24 के लिए प्रस्तुत किये गए बज़ट में नई कर प्रणाली में भी अब स्टैण्डर्ड डिडक्शन देने का प्रस्ताव किया गया है| इस वर्ष से यानी वर्ष 2023-24 से नई कर प्रणाली (न्यू टैक्स रिजीम) में कई महत्त्वपूर्ण बदलाव (changes) किये गए है| जिनका विवरण नीचे दिया गया है|-

नई कर प्रणाली में बदलावों को जानने से पहले नई टैक्स स्लैब (New Tax Slab) को देखते हैं कि न्यू टैक्स स्लैब में कर की क्या-क्या दरें निर्धारित की गयी हैं|

नई कर प्रणाली (ब्यवस्था) की टैक्स स्लैब्स 2023 : Tax Slabs of New Tax Regime for 2023-24 in hindi

कुल आय  आयकर की दर 
0 से 3,00,000 तक शून्य
3,00,001 से 6,00,000 तक 5%
6,00,001 से 9,00,000 तक 10%
9,00,001 से 12,00,000 तक 15%
12,00,001 से 15,00,000 तक 20%
15,00,000 से अधिक 30%

नई कर प्रणाली (old vs new tax regime)

बज़ट 2023-24 में नई कर प्रणाली में किये गए बदलाव / फायदे: Changes made in New Tax Regime (NTR) in Budget 2023

  • आयकर छूट की सीमा को बढाकर 3 लाख रूपए कर दिया गया है पहले यह छूट सीमा 2.5 लाख रुपये थी|
  • सात (7) लाख रूपए तक की आय पर कोई टैक्स नही लगेगा| पहले पांच(5) लाख रूपए तक की आय पर कोई टैक्स नहीं लगता था| यहाँ यह ध्यान देने वाली बात है कि सात लाख तक की आय में तभी कोई टैक्स नहीं लगेगा जब आपकी कुल कर योग्य आय 7 लाख रूपये या इससे कम है| किन्तु यदि कर योग्य आय 7 लाख रूपए  से एक रूपए भी अधिक है तो आपको 3 लाख से 7 लाख तक की आय पर भी टैक्स देना पड़ेगा |
  • Rs. 50000/- का Standard Deduction अब नई कर प्रणाली में भी लागू कर दिया गया है| पहले यह डिडक्शन सिर्फ पुरानी कर प्रणाली में दिया जाता था|
  • यदि किसी की कुल आय 15.5 लाख रुपए या अधिक है तो उसे स्टैण्डर्ड डिडक्शन के रूप में 52500/- रुपये की छूट दी जाएगी| पहले ऐसी कोई ब्यवस्था नहीं थी|
  • नई कर ब्यवस्था को अब डिफ़ॉल्ट कर ब्यवस्था बनाने का प्रस्ताव दिया गया है| इसका मतलब यह हुआ कि यदि आप कहेंगे या अपने DDO को लिखकर देंगे कि हमारा टैक्स पुरानी टैक्स ब्यवस्था के आधार पर गणना किया जाये और काटा जाये, तभी आपका टैक्स पुरानी कर प्रणाली के आधार पर काटा जायेगा| अन्यथा आपका टैक्स नई कर प्रणाली के आधार पर ही गणना और किया जायेगा और काटा जायेगा | आपको फायदा हो या नुकसान हो|
  • ऐसा नहीं है कि एक बार यदि आपने नई या पुरानी किसी भी कर प्रणाली को चुन लिया तो उसे अगले साल बदला नही जा सकता है| अगले साल फिर आप उसे बदल सकते है जिस भी कर प्रणाली में आपको फायदा हो रहा हो उसे चुन सकते हैं|
  • नई कर ब्यवस्था में अब tax slab की संख्या 6 से घटाकर 5 (पांच) कर दी गयी है|

पुरानी कर प्रणाली क्या है? What is old tax Regime in hindi?

पुरानी कर प्रणाली (ब्यवस्था) के अंतर्गत ब्यक्तिगत करदाता को उसकी कुल आय में काफी सारे डिडक्शन दिए जाते हैं यदि वह उनके लिए योग्य होता है | जिससे करदाता का कर भार काफी कम हो जाता है| 

पुरानी कर प्रणाली (purani kar pranali) के अंतर्गत मिलने वाले डिडक्शन में कुछ महत्वपूर्ण डिडक्शन है जैसे- 80C के अंतर्गत, 80D , 80E, 24b, 80CCD, 80 TTA/ 80TTB, HRA/ House Rent के अंतर्गत मिलने वाले डिडक्शन | 

जिसको उपरोक्त में से ज्यादातर डिडक्शन का फायदा लेना है तो उसके लिए पुरानी कर प्रणाली ही बेहतर होगी | आगे हम विस्तार से चर्चा करेंगे कि कौन सी कर प्रणाली किसके लिए अच्छी है 

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पुरानी कर प्रणाली के अंतर्गत 80C के अतिरिक्त और कहाँ कहाँ निवेश  करके टैक्स बचा सकते है यह जानने के लिए क्लिक करें

पुरानी कर प्रणाली के अंतर्गत 80C के  अंतर्गत कहाँ कहाँ निवेश करके  टैक्स बचा सकते है यह जानने के लिए क्लिक करें

पुरानी कर प्रणाली (ब्यवस्था) की टैक्स स्लैब्स 2023 : Tax Slabs of Old Tax Regime for 2023-24 in hindi

कुल आय  आयकर की दर 
0 से 2,50,000 तक शून्य
2,50,001 से 5,00,000 तक 5%
5,00,001 से 10,00,000 तक 20%
10,00,000 से अधिक 30%

पुरानी कर प्रणाली (Purani Kar Pranali) के फायदे / विशेषताएं / खूबियाँ : Characteristics of Old Tax Regime

  •  5 लाख रुपए तक की कर योग्य आय में कोई टैक्स नहीं लगेगा
  • जीवन बीमा पालिसी, PPF,GPF, NPS, ELSS म्यूच्यूअल फण्ड , सुकन्या समृद्धि योजना, NSC, होम लोन के प्रिंसिपल के भुगतान आदि में निवेश करने पर अधिकतम 1.5 लाख रूपए तक की छूट कर योग्य आय में प्राप्त की जा सकती है| जिससे आयकर बचत के साथ भविष्य के लिए पैसा भी जमा होता रहता है और धीरे धीरे बढ़ता भी रहता है|
  • पुरानी कर ब्यवस्था के अंतर्गत, होम लोन का ब्याज चुकाने में भी कर योग्य आय में  2 लाख रूपए तक का डिडक्शन प्राप्त होता है| 
  • यदि आपने पढाई के लिए Education Loan ले रखा है तो उसके ब्याज भुगतान का भी डिडक्शन प्राप्त किया जा सकता है|
  • किराये के घर में रहते है तो आप हाउस रेंट का भी डिडक्शन क्लेम कर सकते है पुरानी कर ब्यवस्था के अंतर्गत
  • यदि आपने अपना या अपनी फॅमिली का मेडिकल insurance ले रखा है तो भी आप अपनी कर योग्य आय में 25000 से 1 लाख रूपए तक का डिडक्शन क्लेम कर सकते है|
  • यदि आप या आपके बच्चे या या आप पर निर्भर कोई भी पारिवारिक सदस्य दिव्यांग है तो उस स्थिति में भी आप 75 000 रुपये से लेकर एक लाख रुपये तक का डिडक्शन प्राप्त किया जा सकता है| यह डिडक्शन सिर्फ Purani Kar Pranali में ही मिलता है
  • यदि आपके परिवार में आपको या आपके परिवार के किसी सदस्य को कोई गंभीर बीमारी है तो उस स्थिति में भी आपको 40000 रुपये से लेकर एक लाख रूपए तक का आय में डिडक्शन प्राप्त होता है|
  • यदि आपके बचत बैंक खाते (सेविंग अकाउंट) में ब्याज मिलता है तो उसे आपकी other Income में जोड़ दिया जाता है और उस पर भी आपकी टैक्स स्लैब के आधार पर कर लगाया जाता है| यदि आप purani kar byvastha को अपनाते हैं और आप 60 वर्ष से कम उम्र के है तो आपको उस आय पर अधिकतम 10000/- रुपये तक की कटौती प्राप्त होगी वहीं यदि आप वरिष्ठ नागरिक है तो आपको अधिकतम 50000/- रूपए की कर योग्य आय में कटौती मिलेगी|

 

इस प्रकार से पुरानी कर ब्यवस्था की बहुत सारी खूबियाँ हैं जो  नई कर ब्यवस्था में बिलकुल भी नहीं मिलेंगी |

नई और पुरानी कर ब्यवस्था में कौन सी अच्छी है? : Which one is better, old or new tax regime in hindi

पुरानी और नई कर प्रणाली (Purani aur nai kar byavastha) दोनों ही बढियां हैं किन्तु किसी करदाता की आय और उसके निवेश के आधार पर ही यह सुनिश्चित किया जा सकता है कि कौन सी कर प्रणाली उसके लिए फायदेमंद साबित होगी|  हम यहाँ पर एक जनरल तरीके से देखेंगे कि नई कर प्रणाली किसके लिए अच्छी है और पुरानी कर प्रणाली किसके लिए अच्छी है| 

नई कर प्रणाली किसके लिए अच्छी है? : Nai kar pranali kiske liye achchhi hai?

नई कर प्रणाली उसके लिए अच्छी है-

  • जिसकी आय 7.5 लाख रूपए या इससे कम है | क्योंकि उसे स्टैण्डर्ड डिडक्शन मिलने के बाद उसकी आय 7 लाख रूपए या इससे कम हो जाएगी | और 7 लाख से कम होने पर उसे 87 A के अंतर्गत पूरे टैक्स की रिबेट मिल जाएगी और उसका टैक्स शून्य हो जायेगा  
  • जो ब्यक्ति टैक्स बचत के लिए कुछ भी,कहीं भी निवेश नहीं करना चाहता है या किसी कारणबस नही कर पाया है| उसके लिए नई कर प्रणाली बहुत बढ़िया साबित होगी| क्योंकि पुरानी कर प्रणाली की तुलना में  नई कर ब्यवस्था के अंतर्गत उसे कम टैक्स देना पड़ेगा| 
  •   यदि आय दस लाख से अधिक है तो भी उसके लिए नई कर ब्यवस्था फयादेमदं साबित होगी कितु कुछ केस में पुरानी कर ब्यवस्था ही फायदेमंद साबित होगी | जैसे- यदि किसी करदाता की आय 11 लाख रूपये है और वह अपनी 80 C की 1.5 लाख की लिमिट को पूरा करता है और साथ ही होमलोन का ब्याज भी 2 लाख रुपये तक चुकाता है तो उसके लिए  पुरानी कर प्रणाली ही फायदेमंद साबित होगी| क्योंकि पुरने कर ब्यवस्था में उसका टैक्स कम आयेगा|
  • ओवरआल देखा जाये तो नई कर ब्यवस्था उन सब करदाताओं के लिए फायदेमंद है जो किसी प्रकार का निवेश अपनी कर बचत के लिए नहीं करना चाहते हैं बल्कि अपनी बचत को उन जगहों पर निवेश करना चाहते हैं जहाँ पर कोई लॉक-इन अवधि नही होती हो  और रिटर्न भी बेहतर मिले सके | 

 

पुरानी कर प्रणाली किसके लिए अच्छी है?: Purani kar pranali kiske liye achchhi hai?

पुरानी कर ब्यवस्था उनके लिए अच्छी है-

  • जिनकी आय 7.5 लाख रूपए से अधिक है और 10 लाख रूपए से कम है साथ ही वे टैक्स सेविंग विकल्पों में निवेश करते हैं और 2 लाख रुपये तक होम लोन के ब्याज का भुगतान भी करते हैं|
  • पुरानी कर प्रणाली उनके लिए भी फायदेमंद है जो उक्त में निवेश किकल्पों के साथ साथ दिव्यांग है या उनके दिव्यांग आश्रित पारिवारिक सदस्य हैं|
  • पुरानी कर ब्यवस्था उनके लिए भी फायदेमंद होगी जो प्रथम या उक्त विकल्पों के साथ साथ किसी NPS में भी 50000/- रूपये तक निवेश करना चाहते हैं
  • ओवरआल ऐसा कहा जा सकता है कि पुरानी कर प्रणाली उनके लिए अच्छी होगी जो अधिक से अधिक डिडक्शन के योग्य और हक़दार है| यानि जो जितने अधिक डिडक्शन के लिए योग्य होगा उसके लिए पुरानी कर प्रणाली उतनी ही लाभदायक होगी|

नए और पुराने आयकर ब्यवस्था में आयकर की गणना : Nai aur purani kar byavastha me aaykar ki ganana

आयकर की गणना यदि सालाना आय : 7.5 लाख रुपये
  Old tax Regime  New Tax Regime
Total Income 750000 750000
Standard Deduction 50000 50000
Deductions claimed 200000 0
Net Taxable Income 500000 700000
Total Tax (incl.Cess) 0 0
आयकर की गणना यदि सालाना आय : 10 लाख रुपये
  Old tax Regime  New Tax Regime
Total Income 1000000 1000000
Standard Deduction 50000 50000
Deductions claimed 250000 0
Net Taxable Income 700000 950000
Total Tax (incl.Cess) 54600 54600
आयकर की गणना यदि सालाना आय : 15 लाख रुपये
  Old tax Regime  New Tax Regime
Total Income 1500000 1500000
Standard Deduction 50000 50000
Deductions claimed 300000 0
Net Taxable Income 1150000 1450000
Total Tax (incl.Cess) 163800 145600
आयकर की गणना यदि सालाना आय : 20 लाख रुपये
  Old tax Regime  New Tax Regime
Total Income 2000000 2000000
Standard Deduction 50000 50000
Deductions claimed 400000 0
Net Taxable Income 1550000 1950000
Total Tax (incl.Cess) 288600 296400

इस प्रकार से आप अपनी आय पर लगने वाले टैक्स की गणना कर सकते हैं | कौन सी कर ब्यवस्था किसके लिए फायदेमंद होगी यह उस ब्यक्ति के deductions पर निर्भर करेंगा | यदि ब्यक्ति के डिडक्शन अधिक हैं तो उसे पुरानी कर ब्यवस्था में लाभ हो सकता है| और यदि डिडक्शन कम हैं तो उसे नई कर ब्यवस्था में लाभ मिलेगा |

 सभी को पुरानी कर ब्यवस्था में मिलने वाले Deductions पर ध्यान रखना होगा और जितना अधिक से अधिक डिडक्शन मिल सकें, उन्हें लेने के बारे में सोचना चाहिए | इससे दो फायदे होंगे एक तो टैक्स कम पड़ेगा यदि डिडक्शन अधिक हैं और दूसरा यह कि मिलने वाले डिडक्शन कहीं न कहीं हमारे लिए एक बचत हैं जो भविष्य में अच्छे रिटर्न के साथ वापस मिलेगी | नई कर व्यवस्था बचतों को बढ़ावा देने वाली नहीं है किन्तु टैक्स की बचत करने में मददगार साबित होगी|

धन्यवाद

 S.R. Verma

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